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भाभी ने सिनेमाहाल में सेक्स का मजा दिया

सेक्स इन पब्लिक स्टोरी में पढ़ें कि मैं अपनी भाभी के साथ शहर में खरीदारी करने आया. वहां भाभी ने अपनी बहन को भी बुला लिया और हम फिल्म देखने गए.

मेरे प्यारे दोस्तो, आपने मेरी एक कहानी
भूसे वाले कोठे में भाभी की चुदाई
पढ़ी होगी.

अगर नहीं पढ़ी तो अब पढ़ लो।
चूत रगड़ रगड़ कर मचल जाओगी और लंड ढूंढती रहोगी अंदर घुसाने को।

आज मैं नई सेक्स इन पब्लिक स्टोरी लिख रहा हूं। इन कहानियों में बिल्कुल सच वाली घटना होती है.
तो नई चुदाई का मज़ा लो दोस्तो और आपको मज़ा आया या नहीं; ये मुझे कॉमेंट करके जरूर बताना।

मैं शिवम् उम्र 19 वर्ष
कद 6 फिट
लंड 8″ होगा।

मेरी भाभी की उम्र 23 वर्ष
कद 5′ 7″
फीगर 34 28 36
रंग बिल्कुल संगममर की तरह
कामुक अदाएं।

एक दिन खेत पर काम नहीं था तो भाई भाभी ने शहर जाने का प्लान बनाया।
तो पापा ने भी बुआ जी के यहां जाने की बात कही।

और अगली सुबह पापा जल्दी चले भी गए।

क्योंकि गांव में सब सुबह 4 या 5 बजे ही उठ जाते हैं तो भाभी और भाई भी शहर जाने की तैयारी कर रहे थे.
पता नहीं भाई के मन में क्या आया कि उसने शहर जाने के लिए मना कर दिया।

तो भाभी बोली- अब मैं अकेली कैसे आऊंगी?
भाई बोला- फिर किसी दिन चल पड़ेंगे. आज रहने दे!

तो भाभी निराश हो गई और रसोई में जाने लगी.
भाई भी घर से बाहर चले गए।

माँ ने पूछा- क्या हुआ; तुम दोनों जा नहीं रहे?
भाभी ने बताया कि उनका मन बदल गया और मना कर दिया।

तो माँ बोली- वो तो शुरू से ही ऐसा है. उसकी अक्ल खराब है. तू एक काम कर … छोटू (शिवम्) के साथ चली जा।
मैं खुश हो गया।

माँ- छोटू जा तू ले जा बहू को … इसको सामान लाना है शहर से!
मैं- ठीक है माँ … पर मैं अपने लिए भी कपड़े लूंगा।
माँ- दो महीने पहले तो लाया ही था। इतने पैसे खराब माँ करते भाई … थोड़ा खर्च करा करते।

तभी भाभी ने मुझे चुप होने का इशारा किया और अपनी तरफ बुलाया- शिवम्, चलो कपड़े बदल लो और जल्दी करो. 8 तो यहीं बज गए. फिर वापस आते आते शाम हो जाएगी।

मैंने मुंह धोया और कपड़े बदलने अंदर चला गया.
भाभी मेरी जीन्स और शर्ट निकाल कर बेड पर रखे थे।

मैंने अपनी शर्ट उतार दी और नई शर्ट पहनने लगा.
तो भाभी बोली- रुको शिवम्, बनियान भी बदल लो।
मैंने बनियान भी उतार दिया.

भाभी मुझे बनियान देती हुई मेरी छाती को ध्यान से देख रही थी.
ऐसा लग रहा था जैसे कोई लड़का किसी सेक्सी लड़की के चूचे को देख कर कामुक हो जाता है।

मैंने बनियान पहन लिया और जीन्स उतार दी.
तो भाभी अब मेरे अंडरवियर में से लंड के आकार को देख रही थी।
पर उन्हें ज्यादा डर नहीं दिखा.

मैंने कपड़े पहन लिए और हम दोनों कमरे से बाहर आए।

माँ- छोटू, आराम से जाइए. चाहे थोड़ा टाइम ज्यादा लग जावे। बहू तू घर का समान भी याद रखिए। कभी भूल जा!

मैं बाइक निकाल कर ले आया.
भाभी ने अपनी साड़ी को ठीक किया और घूंघट ओढ़ कर पीछे बैठ गई।

हम गांव के बाहर निकले तो भाभी ने घूंघट उठाया और मुझसे बात करने लगी।

भाभी- शिवम्, पहले तो कपड़े वाले के यहां जाना है. और फिर घर का सामान लेना है।

मैं- भाभी किसके कपड़े लेने आपको?
भाभी- अरे … छोटे से भाई के (भाभी का बेटा) और दो चार मैं अपने भी लूंगी। तू भी ले लेना।

मैं- भाभी कितने पैसे दिए माँ ने?
भाभी- तू फ़िक्र ना करे … बहुत हैं पैसे … सबके कपड़े आ जाएंगे और बच भी जाएंगे।

मैं- भाभी मैं तो दो जीन्स लूंगा और दो तीन शर्ट भी।
भाभी- हाँ दो चार अंडरवियर भी ले लेना। पुराना हो गए हैं अब!

मैं हंस दिया और कहा- भाभी, आप बड़ा ध्यान दो मेरे अंडरवियर पर?
भाभी- अरे तेरी वाइफ तो है नहीं. अब मुझे ही तो देखना पड़ेगा।

मैं- भाभी, वाइफ तो आ जाएगी. पर आप खुद ही देर कर रही।
भाभी- मुझे क्या फायदा देर करने से। मेरा बस चले तो आज ही ले आऊँ।

मैं- तो भाभी, आपने अपने घर बात क्यूँ ना करी. माँ ने कई महीने पहले कहा था।
भाभी- अरे शिवम्, मैं उस दिन के बाद मैं घर गई ही नहीं … तो बात कैसे करती?

मैं- भाभी फोन पर के लेती. कितनी बार तो बात की तुमने फोन पर!
भाभी- ऐसी बात फोन पर ना करते। तू पागल है. चल अबकी बार मैं जाते ही कर दूंगी तेरी बात!

मैं- भाभी, मुझे पता तू बहाना बना रही। शादी ना करवानी तो मना कर दे! मैं तेरे भरोसा पर बैठा हूं।
भाभी हंसने लगी- तू तो गुस्सा हो गया मेरे बच्चे! मैं तो हूं जब तक शादी ना होती! थोड़ा प्यार मुझसे कर लिया कर!

मैं- भाभी, आपके साथ प्यार करने का मौका कहाँ मिले।
भाभी- आज तो अकेले है आज कर ले।

मैं- भाभी यहाँ सड़क पे कैसे करूं?
भाभी आगे की तरफ खिसक गई और अपनी चूची मेरी कमर पर दबा दी।
फीर कान के पास धीरे से बोली- चल आज मैं तुझे शहर दिखाती हूं। वहीं करेंगे प्यार!
भाभी ने मेरे गाल पर एक किस कर दिया।

मैं बोला- भाभी, अगर आप साड़ी ना पहनती तो दोनों तरफ पैर करके बैठ जाती और मेरी से चिपक कर बैठती तो बड़ा मज़ा आता।
भाभी- हाँ गोद में बैठ जाऊं क्या?
और हंसने लगी।

मैं- भाभी, गोद में बैठ जाओगी तो मज़ा ही आ जायेगा।

हम बात करते हुए शहर में आ गए।

भाभी बोली- चल साथ आ जा. तेरे भी कपड़े लेने हैं।
उन्होंने मेरे और छोटू (उनका बेटा) के कपड़े लिए और फिर अपने लिए लेने लगी।
तो मैं भी उनके साथ ही था।

भाभी- 34 नंबर में दो दे दो।
दुकानदार- कलर कौन सा दूँ बहन जी?
भाभी- ब्लैक या रेड जो भी हो।

तो दुकानदार ने ब्रा और पैंटी के कई सेट निकाल दिए और भाभी ने दो ले लिए।

अब हम दुकान से बाहर आए तो मैंने भाभी को कहा- भाभी, दोनों ब्लैक ही ले लेती. मेरे भी ब्लैक कलर ही हैं।
भाभी- अच्छा, अब तेरी पसंद की ब्रा पहननी पड़ेगी मुझे?
और हंसने लगी।

मैं- नहीं भाभी, आपका रंग इतना गोरा है कि कुछ भी पहनो आप तो सुंदर ही लगो।
भाभी- और जब कुछ ना पहनी तब सुंदर ना लगती?
मैं- फिर तो मज़ा ही आ जावे।

मैंने भाभी को बेग दिए और वो बाइक पर सवार हो गई।
भाभी- शिवम्, मैं एक फोन मिला लूं, फिर चलना।

मैं रुक गया तो भाभी ने अपनी बहन से बात की।
उसने कहा कि वो शहर में ही है।

हमारा और भाभी का शहर एक ही है बस गांव दूर है।

भाभी- चल शिवम्, आज तुझे तेरी होने वाली दुल्हन से मिला ही दूँ। नहीं तो आज तू मेरे साथ ही कुछ कर देगा।
मैं- कहाँ है वो भाभी?

भाभी ने एक मॉल के बारे में बताया और हम वहाँ चले गए।

कुछ देर बाद भाभी की छोटी बहन प्रिया भी वहीं आ गई और वो अपनी बहन से बात करने लगी।

प्रिया- ऋतु, तुम तो जीजा जी के साथ आने को बोल रही थी?
भाभी- अरे, जीजा के साथ ही तो आई हूं।
प्रिया हंसने लगी- यू तो शिवम् है अब इससे दूसरी शादी कर ली के?
वो हंसने लगी।

भाभी- यू तेरा नहीं मेरा जीजा है। शादी तो तेरी होगी इसके साथ!
प्रिया शरमा गई और चुप हो गयी।

भाभी- चल शर्मावे ना ज्यादा … मैं तो तुम दोनों को मिलान के लिए लाई थी। तुम दोनों को पसंद हो तो मैं मम्मी से बोल दूंगी।
प्रिया कुछ नहीं बोली।

भाभी- चल कहीं बैठ कर बात करते हैं।

हम सब एक रेस्टोरेंट में बैठ गए।

प्रिया भाभी के कान में कुछ बोल रही थी।

मुझे कुछ अजीब सा लगा पर भाभी तो अपनी मस्त चीज़ है।
उसने प्रिया की बात का जवाब जोर से दिया जो मुझे भी सुना।

प्रिया- …
भाभी- पागल है तू? शरीफ बच्चा है मेरा! एकदम आज्ञाकारी।
प्रिया अब चुप हो गई.

तो मैंने पूछा- क्या हुआ भाभी?
भाभी- कुछ नहीं … तुझे कुछ पूछना हो तो पूछ ले।
मैं- भाभी बस नू पूछ लो या शादी करना चाहती है क्या?

भाभी- अरे इससे पूछ ले। मेरी शादी तो गई। मुझे दोबारा नहीं करनी है।
अब हम दोनों भी भाभी के साथ हंसने लगे।

भाभी- चलो अभी तो 10 बजे एक फिल्म ही देख लेते हैं. थोड़ा समय और साथ में बात करने का मौका मिल जायेगा।

तो हमने 10:15 पर शुरू होने वाली एक फिल्म के टिकट ले लिए (Mumbai 125 KM)

हम अंदर गए तो अभी ज्यादा भीड़ नहीं थी।
20 – 25 लोग थे जिनमें से ज्यादा तो कपल ही थे।

फिल्म शुरू हुई.
एक गाना आया और इस गाने में काफी हॉट सीन थे।

तो हमसे अगली सीट पर बैठे कपल ने किस करना शुरू कर दिया.
हम तीनों उन्हें देखने लगे।

मैं अब उनको देखते हुआ प्रिया और भाभी को भी देख रहा था।
ज्यादा रोशनी नहीं थी तो भाभी ने मेरे हाथ पर अपना हाथ रख दिया.

तो मैंने भाभी का हाथ पकड़ कर अपनी ज़िप के ऊपर रख दिया.
भाभी ने मेरे सिर को पकड़ा और कान में धीरे से बोली- शिवम्, प्रिया के सामने अच्छे से रह … वरना इसको पता चल जाएगा। और तेरी शादी में प्रॉब्लम हो सकती है।

मैं चुपचाप बैठ गया और फिल्म देखने लगा.

उस फिल्म में किस के सीन बहुत ज्यादा थे.
पर अब तो हीरो हीरोइन को गोद में बैठा कर बुरी तरह चूस रहा था और मेरा लंड खड़ा हो गया था।

भाभी ने अब प्रिया के कान में कुछ कहा.
फिर भाभी उठ गई और मेरे आगे आ गई.

वैसे तो सीट में काफी जगह थी पर वो मेरी तरफ़ पीठ करके मेरी गोद में लगभग बैठते हुए मुझसे अगली सीट पर बैठ गई।
और अब प्रिया भाभी वाली सीट पर आ गई।
मुझे समझ नहीं आया क्या खिचड़ी पकी है।

अब प्रिया ने मेरी और अपनी सीट के बीच वाले हिस्से पर हाथ रखा.
वहाँ मेरा हाथ पहले से ही था.
तो उसने अपना हाथ हटा लिया और मेरी तरफ देखने लगी।

तो मैंने अपना हाथ उठा कर अपने पैर पर रख लिया और प्रिया को बोला कि वो अब हाथ रख सकती है।

पर उसने सुना नहीं तो मैंने उसके कान के पास जाकर बोला.
तो मेरा मुंह उसके कान से टकरा गया जैसे मैंने उसे किस किया हो।

मैंने बहुत जल्दी से खुद को पीछे किया और सॉरी बोला।
तो प्रिया ने अपना हाथ से मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- कोई बात नहीं. तुमने जानबूझ कर नहीं किया. मैं जानती हूं।

फिर हम दोनों के हाथ एक साथ ही रखे हुए थे।

भाभी ने अपने हाथ मेरे ज़िप पर घुमाने लगी वो शायद देख रही थी कि प्रिया मेरा लौड़ा खड़ा कर रही हो।
पर ऐसा कुछ नहीं था और भाभी ने हाथ हटा लिया।

अब मेरा मूड बनने लगा मेरे साथ दो इतने सुन्दर माल थे और कुछ कर नहीं सकता था।

मैंने प्रिया के हाथ की उंगलियों में अपनी उंगली अंदर फंसा दी तो प्रिया ने भी हाथ जोर से पकड़ लिया।

तो मैं उसकी सीट की तरफ मुड़ा तो उसने अपना कान आगे किया।
उसे लगा कि मैं कुछ बोलने वाला हूं.
पर मैंने उसके गाल पर किस कर दिया।

उसने कहा- अरे दीदी हैं. कुछ तो शर्म करो।
मैं रुक गया और फिल्म देखने लगा।

फिर इंटरवल हो गया और हम बाहर आए।

मैं टॉयलेट करने गया अपना लंड को शांति देने के लिए!
तो प्रिया बोली- ऋतु, अब मैं तो जाती हूं। कॉलेज भी जाना है. तुम दोनों देख लो फिल्म।

वो चली गई तो मुझे बहुत अच्छा लगा कि अब भाभी के साथ कुछ हो सकता है।

हम फिर से अंदर आ गए.
फिल्म शुरू हो चुकी थी, अंधेरा छा गया था.

तो मैं भाभी का हाथ पकड़ कर अपनी सीट पर आ गए।
भाभी ने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी चूची पर रख दिया।
मैं उनकी चूची दबाने लगा.

और वो मेरी ज़िप खोल कर लंड हाथ से पकड़ कर सहलाने लगी।

अब मैंने भाभी की गर्दन पकड़ी और उनके होंठ चूसने लगा. भाभी भी मुझे पूरे मज़े से चूस रही थी।

काफी देर चूसने के बाद भाभी ने आगे पीछे देखा और मेरा लौड़ा मुंह में लेकर चूसने लगी.
तो मेरा पानी निकलने लगा.
उन्होंने पूरा पानी चूस लिया।

फिर मैंने भाभी की चूत को छूने की कोशिश की तो भाभी बोली- साड़ी मत उतार देना. बहुत देर में बंधती है।

तो मैंने कहा- भाभी मुझे लंड अंदर डालना है.
वो बोली- सेक्स इन पब्लिक करेगा तू? अरे … घर जाकर डाल लेना. यहां तो प्रॉब्लम हो जाएगी.

पर मैंने काफी जिद की तो भाभी ने कहा- ठीक है, मैं साड़ी ऊपर उठा कर तुम्हारी गोद में बैठ जाऊंगी।

तो मेरे लंड में तनाव आ गया.

मैंने भाभी का हाथ पकड़ कर नीचे लंड पर रख दिया. भाभी ने लंड सहलाकर खड़ा कर दिया।
फिर भाभी ने साड़ी के नीचे से अपनी पैंटी उतार दी और मुझे बैग को बगल में रखने को बोला.

और खुद अपनी साड़ी उठा कर मेरे लंड पर बैठने लगी तो पूरा लंड भाभी की चूत के अन्दर चला गया.
अब भाभी मेरी गोद में धीरे धीरे से ऊपर नीचे होने लगी.

पर मेरे लंड में तो आग सी लग गई थी.
मैंने भाभी के पेट को पकड़ा और ऊपर की तरफ उठ कर जोर से धक्का मारा तो लंड भाभी की चूत की गहराई तक उतार दिया।

भाभी के मुंह से भी आह निकल गई।
अब भाभी बिल्कुल अगले वाली सीट पर गिर गई उन्होंने हाथों से सीट पकड़ कर खुद को घोड़ी जैसे कर लिया.

मैं तो पूरे जोश से भर कर धक्के मारने लगा; और भाभी सिसकारी भरने लगी।
मेरा पानी भाभी की चूत के के अंदर ही निकल गया.

फिर मैं अपना लंड भाभी के अंदर से निकाल कर सीट पर वापस बैठ गया।

भाभी ने भी अपनी साड़ी ठीक की और पास वाली सीट पर वापस बैठ गई।
इस तरह मैंने भाभी के साथ सेक्स इन पब्लिक किया.

फिर हमने कुछ देर तक फिल्म देखी जिसमें मज़ा नहीं आया तो हम बाहर आ गए।

भाभी बोली- चलो अब घर चलते है।
और हम कुछ और सामान खरीद कर घर आ गए।
भाभी बोली- आज तो मज़ा सा गया! अब तू पूरा जवान हो गया है।

तो मेरे प्यारे पाठको, कैसी लगी सेक्स इन पब्लिक स्टोरी? सिनेमाहाल में मेरी भाभी की चुदाई की कहानी?
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